Sad Dard Bhari Shayari Hindi

Sad Dard Bhari Shayari Hindi

 

Sukoon milta hai do lafz kaagaz par utaar kar ..

Cheekh bhi leta hoon aur aawaaz bhi nahi hoti ………

……………………………………………………………………………………..

थोड़ी चालाकी से थोड़ी सी गद्दारी से,
महल दोस्ती का जला इक चिंगारी से,
========================

दिल टूटा तो इक आह भी नहीं निकली,
रिश्ते हमने निभाए बड़ी खुद्दारी से,
========================

दाखिला ले लिया खुदगर्ज़ी के मकतब में,
दिल फिर से लगाएंगे पर होशियारी से,
========================

पहरा काँटों का है चारों तरफ मुस्तैद बड़ा,
फूल इस बार खिले हैं पूरी तैयारी से,
========================

ये मुहब्बत का मर्ज़ लाइलाज होता है,
कितने बर्बाद हो गए हैं इस बीमारी से,
========================

जलूँगा कब तलक तनहा मैं शरारों की तरह,
कभी उतरो मेरे आँगन में सितारों की तरह,
==========================

मैं एकटक तुझे देखा करूँ, देखा ही करूँ,
चाँदनी रात के पुरनूर नज़ारों की तरह,
==========================

पास रह के भी मिलना ना हो सका अपना,
बरसों साथ चले हम दो किनारों की तरह,
==========================

छुपा के रखता मैं दुनिया से तुम्हें पर ये मेरे,
हाथ में है नहीं किस्मत के सितारों की तरह,
==========================

तेरी यादों से कह कभी तो सोने दें मुझको,
आवाज़ देती हैं शब भर पहरेदारों की तरह,
==========================

आसरा तेरे प्यार का जो मिल गया होता,
उम्र कटती नहीं अपनी बेसहारों की तरह,
==========================

……………………………………………………………………………………………..

बेटे भी घर छोड़ के जाते हैं..
अपनी जान से ज़्यादा..प्यारा लेपटाॅप छोड़ कर…
अलमारी के ऊपर रखा…धूल खाता गिटार छोड़ कर…
जिम के सारे लोहे-बट्टे…और बाकी सारी मशीने…
मेज़ पर बेतरतीब पड़ी…वर्कशीट, किताबें, काॅपियाँ…
सारे यूँ ही छोड़ जाते है…बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
अपनी मन पसन्द ब्रान्डेड…जीन्स और टीशर्ट लटका…
अलमारी में कपड़े जूते…और गंध खाते पुराने मोजे…
हाथ नहीं लगाने देते थे… वो सबकुछ छोड़ जाते हैं…
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…
आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं…
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं…
अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…
अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
पैसे कमाने की होड़ में…वो भी कागज बन जाते हैं…

सिर्फ बेटियां ही नहीं साहब…
. . . . बेटे भी घर छोड़ जाते हैं..!

Dedicated to all boys

……………………………………………………………………………

 




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *